<![CDATA[ Life's Cheat Sheet - Ephemeral]]>Mon, 15 Feb 2016 08:51:46 -0800Weebly<![CDATA[On my best friend's wedding]]>Wed, 03 Dec 2014 18:10:41 GMThttp://www.shefalibajpai.com/ephemeral/o-my-best-friends-weddingक्या खूब करिश्मा है मोहब्बते का करिश्मा. दो शख्सों के मिलने में फ़िरदौस का आलम है. 
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<![CDATA[Zindagi]]>Fri, 17 Oct 2014 14:50:00 GMThttp://www.shefalibajpai.com/ephemeral/zindagi
ज़िन्दगी सीखा ही देती है ज़रूरी मसले 
कभी थपकी से कभी ठोकर से 
और कभी एक मीठी चुटकी काटके 


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<![CDATA[Iktarfa]]>Fri, 17 Oct 2014 14:36:14 GMThttp://www.shefalibajpai.com/ephemeral/iktarfaयूं तो कई शामों में साथ डूबे हैं हम,  होते ही नए से निखार आते और मुझे बरसों लग जाते… ]]><![CDATA[Bulbule]]>Fri, 17 Oct 2014 14:26:15 GMThttp://www.shefalibajpai.com/ephemeral/bulbule वोह दिन  भी हुआ करते थे जब हर चीज़  हमेशा के लिए होती थी
उन्ही दिनों  जो रिश्ते संजोये थे वोह आज तक मुकम्मल हैं

आजकल तोह सबकुछ, पानी के बुलबुलों सा, बनता है बिखरता है

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<![CDATA[Heartache]]>Fri, 17 Oct 2014 14:10:53 GMThttp://www.shefalibajpai.com/ephemeral/heartacheAn avalanche of emotions and no safe place to goto]]><![CDATA[Death]]>Wed, 16 Jul 2014 22:25:19 GMThttp://www.shefalibajpai.com/ephemeral/july-16th-2014Death is the fullstop that makes life a statement.]]><![CDATA[Woh]]>Thu, 09 Aug 2012 14:33:07 GMThttp://www.shefalibajpai.com/ephemeral/wohवोह हवा के इक  सर्द झोंकें की तरह था , न इतना तेज़ की तूफ़ान की तरह बुनियाद हिला दे और न साँसों की तरह  हल्का जिसका एहसास ही न हो.
न उसके आने का डर होता न जाने की परवाह. बस जब रहता तोह कई एहसास कई अरमान जाग जाते, रूह मुस्कुराने लगती .

उसपे न कोई हक था न उसकी कोई ज़रुरत. वोह समंदर की तरह था  जो किसी का नहीं था और सबका ही था.
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<![CDATA[Maazi]]>Thu, 09 Aug 2012 14:28:05 GMThttp://www.shefalibajpai.com/ephemeral/maaziमेरे कल का इश्तेहार आज के अख़बार में ,
बीते पलों को गुनगुनाती मेरे हाथ की घडी

किताब क्यूँ आज फिर उलटी पढ़ी मैंने 
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<![CDATA[Adhoori Kahani]]>Tue, 06 Mar 2012 15:42:34 GMThttp://www.shefalibajpai.com/ephemeral/adhoori-kahaniकहानी ज़हन में कुछ यूँ निखरी जैसे नयी दुल्हन की हल्दी हुई हो, कागज़ पर उतरेगी तोह कुमकुम से सजावट होगी 
 stepping down a train in kurla station .. a story strikes me :)
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<![CDATA[Muafza]]>Thu, 02 Feb 2012 15:38:00 GMThttp://www.shefalibajpai.com/ephemeral/muafzaRoz jaan  rakhke waqt khareedti thi woh... aaj sareaam uski jaan neelam huee... waqt ne mudkar bhi na dekha use.
when a girl fell off a running train and broke her leg in kurla

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